शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

(लघुकथा) सुसाइड नोट




नदी पर पुल से गुजरते किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी कि पुल के ठीक बीच, किनारे पर एक जोड़ी जूते पड़े हुए हैं. पुलिस का अंदेशा ठीक निकला, एक जूते में सुसाइड नोट मिला जिसमें कुछ यूं लिखा था.



- ''ऐसे ही दुखी हूँ इसलिए नदी में कूद कर जान दे रहा हूँ. मेरा हॉटमेल पर एक ईमेल अकाउंट है जिसका लॉग-इन 'जय हो 1' और पासवर्ड 'क्यों जय हो 1' हैं. उसकी स्काइड्राइव में कुछ अनर्गल फ़ाइलें पड़ी हैं उन्हें डिलीट करके सभी एड्रेस-बुक वालों को मेरे जाने की ख़बर दे देना. एक ईमेल अकाउंट इंडियाटाइम्स पर भी है, लेकिन ये सर्विस जल्दी ही बंद होने वाली है इसलिए उसे जाने दें, इस सिलसिले में कुछ नहीं करना है. एक एक अकाउंट याहू और जीमेल पर भी हैं पर उन्‍हें मैं यूज़ नहीं कर रहा था. फ़ेसबुक पर भी एक आई-डी है, उसके लॉग-इन और पासवर्ड भी हॉटमेल वाले ही हैंउसकी फ़्रेंडलिस्ट में यूं तो हज़ारों नाम हैं पर उनमें से ज्यादातर का कोई ख़ास मतलब नहीं है बस एक अपडेट वहां दे देना कि 'जय हो' अब नहीं रहा इसलिए फ़्रेंडरिक्वेस्ट और मैसेज न भेजें. चाहो तो यह अकांउट भी बाद में डिलीट कर देना. मोबाइल में दो सिम कार्ड हैं, दोनों प्रीपेड हैं इसलिए चिंता की कोई बात नहीं, जब बैलेंस ख़त्म हो जाएगा तो प्रॉपर्टी बेचने वालों के एस.एम.एस. आने अपने-आप बंद हो जाएंगे. उसमें कुछ फ़ुकरों वाला म्यूज़िक भी है. और अंत में, मेरे बहुत से दुश्मन हैं मुझे आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप किसी पर भी लगा कर आराम से साबित किया जा सकता है. पुलिस जी भूलना मत, उन्होंने मुझे आराम से जीने नहीं दिया अब उनकी बारी है, उनमें से कई तो बहुत मोटी-मोटी आसामी हैं, बाक़ी आप समझदार हैं ही. जय हो 1.’’
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18 टिप्‍पणियां:

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  2. सुबह से ट्राई कर रहा हूँ, बार- बार ये मैसेज आ रहा है "That Microsoft account doesn't exist. Enter a different email address or get a new account. ". स्स्साला ऊपर (नीचे) जाने से पहले भी झूठ बोलकर गया। :)

    चलिए अब एक ऐसी ही लघुकथा मुझे भी याद आ रही है , सुनाये देता हूँ :- एक गाँव में एक बहुत ही कमीना और कंजूस किस्म का साहूकार था। जिन्दगी भर गाँव वालों की नाक में दम किये रहा। अन्त आया तो सोचने लगा की अब तो ये गाँव वाले बड़े मजे से जीयेंगे। सोचते- सोचते एक आइडिया आया। गाँव वालो को सबको बुला भेजा और बोला,,,,,,, गाँव वालों, मैंने जिन्दगी भर तुम्हे सताया है अब मेरा अंत आ गया है। जैसे ही मैं मरू, मुझे कंधे पर न ले जाकर रस्सी से टांग बांधकर सबके सब घसीटते हुए घाट पर ले जाना। गाँव वाले आपस में फुसफुसाए,,,,,,,, स्स्साला आइडिया तो एकदम जबरदस्त दे रहा है। अब जैसे ही वह साहूकार मरा, गाँव वालों ने वैसे ही किया जैसे उसने उन्हें तरकीब सुझाई थी। घाट पर खींचते हुए उसकी लाश को ले जा रहे थे, इतने में पुलिस आ गई। अरे, इन्होने तो एक आदमी को मार दिया, इन सब गाँव वालों को अन्दर करो, इन्स्पेक्टर अपने सिपाहियों से बोला और,,,,,,,,,,,,,,, !

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    1. आपने साहूकार की कथा को वेजीटेरि‍यन कर दि‍या लगता है :) मैंने तो इसका बीहड़ संस्‍करण सुना था :)

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  3. मेल आई डी की सम्पूर्ण कथा।

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  5. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (19-1-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  6. मजेदार ...मौत न हुई मजाक हो गया ..

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  7. शानदार
    आज का दिन सही जाएगा

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  8. अर्थहीन अच्छी मजेदार कहानी

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  9. इस तंत्र की जय हो .जहां हर पल मरता हो गण ,उस तंत्र की जय हो .जहां पल प्रति पल होतें हों बलात्कार हर उम्र की मादा के साथ .जहां डाल डाल पे वहशियों का हो डेरा

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