वह
एक आम लड़की थी. अपनी सीधी-सादी ज़िंदगी चुपचाप जी रही थी. बिना किसी ख़ास
शिकायत या उम्मीद के. हालांकि उसे इस बात का एहसास था कि उसके पास सोशल सर्कल
नहीं है. पर उसने बचपन से ही, इस बारे में न कभी कोई ख़ास कोशिश की, न ही कभी
परवाह. दूसरों की बातों से भी उसे कभी कोई ख़ास मतलब नहीं रहा लेकिन हां, पर्सनल
कमेंट उसे अच्छे नहीं लगते थे. या तो, वह उन पर रिएक्ट नहीं करती थी या फिर मुंह
बना कर निकल जाती.

अगली
सुबह के अंग्रेज़ी अख़बार में फ़ैशन शो पर रपट थी ‘फ़ैशन अब केवल खूबसूरत लड़कियों
के लिए ही नहीं है.’ अब कमरे से निकलने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी. वह
कहीं, किसी ऐसी जगह छुप जाना चाहती थी जहां कोई उसे ढूंढ न सके, देख न सके.
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बेचारी
जवाब देंहटाएंओह!
जवाब देंहटाएंBahut gahrai hai..
जवाब देंहटाएंNavroj ki shubhkamnaye.
मार्मिक ...
जवाब देंहटाएंऐसा ही होता है ...और क्या कहूं, कुछ तो सोच में बदलाव आया होता .....पर नहीं
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