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बुधवार, 16 जुलाई 2014

(लघुकथा ) समय.



वे दोनों साथ-साथ खेले, पढ़े और बड़े हुए. दोनों बहुत अच्‍छे दोस्‍त थे. जवानी में एक समय वह भी आया जब उन्‍हें दुनि‍या के दुख-दर्द दि‍खाई देने लगे. उन्‍होंने वि‍भि‍न्‍न वि‍चारक पढ़े, क्रांति‍यों और उनके क्रांति‍वीरों की गाथाएं पढ़ीं. मार्क्स की बातें उन्‍हें बहुत भायीं. समय बीतता चला गया. दोनों अपनी-अपनी अलग दुनि‍या में व्‍यस्‍त हो गए.  

लंबे समय बाद, दोनों एक बार फि‍र मि‍ले. एक मि‍त्र दुनि‍यादार हो गया था, उसने समय के साथ ताल मि‍लाते हुए मुस्‍कुराना भी सीख लि‍या था. दूसरे की बात करने का सलीका धीमा था पर बीच-बीच में खौलने की सी बानगी भी देता था. यूं तो दोनों ने खूब बातें कीं पर अब, पता नहीं उनके बीच कोई दीवार सी थी जो नहीं ही गि‍री.

दोनों ने अपनी-अपनी दुनि‍या में लौटने से पहले देखा कि‍ एक फ़र्क़ और था, एक के पांव में अभी भी चप्‍पल थी, दूसरे के पॉंव में अब जूते थे. 

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मंगलवार, 24 जून 2014

(लघुकथा ) जीवन



उसकी पूरी ज़िंदगी नौकरी में ही बीत गई, नौकरी के अलावा उसने कभी कुछ न कि‍या, वह रि‍टायर होने को था. समझ नहीं पा रहा था, अब क्‍या करे. एक दोस्‍त से राय लेने गया.

दोस्‍त ने बताया –‘’मेरी एक रि‍श्‍तेदार हैं. टीचरी से रि‍टायर हुए बीसेक साल हो गए हैं. अकेली एक सोसायटी के फ़्लैट में रहती हैं. सुबह उठकर पक्षि‍यों को पानी डालती हैं. सुबह-शाम सैर करती हैं. दरवाज़े से अख़बार उठाने जाती हैं तो एक बि‍ल्‍ली इंतज़ार कर रही होती है, उसे एक कप दूध पि‍लाती हैं. खाना बनाने और झाड़ू-पोछा करने वाली आती है तो रसोई में उसकी मदद करती हैं और उसकी दवाई का खर्च उठाती हैं. कभी-कभी कुछ-कुछ पकवा कर उसके परि‍वार को भी भेजती हैं. दोपहर में पड़ोस के कुछ बच्‍चे खेलने आ जाते हैं, उन्हें पढ़ा भी देती हैं. हर साल जन्‍माष्‍टमी और पंद्रह अगस्‍त पर बच्‍चों को डांस की तैयारी करवाती हैं. सोसायटी के गेट पर दो चौकीदार होते हैं, वे रात को चाय पी सकें इसलि‍ए शाम को एक कप दूध उन्‍हें भी भि‍जवाती हैं. एक ड्राइवर है जि‍से कभी-कभार गाड़ी चलाने के लि‍ए बुलाती हैं, उसके बच्‍चों का हाल-चाल नि‍रंतर पूछती हैं, वे बच्‍चे भी बीच-बीच में इनके यहां खेलने आते हैं, त्‍यौहार के बहाने उसकी कुछ मदद भी करती हैं. हम बुलाते हैं तो उनका कहना होता है कि‍ उनके पास समय नहीं है.’’  

उसे अपना जीवन अब बहुत छोटा दि‍खने लगा था. वह बस मुस्‍कुरा भर दि‍या.
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