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बुधवार, 24 अप्रैल 2013

(लघुकथा) एक था गधा



एक जंगल था, स्‍याह जंगल. जंगल में एक हाथ को दूसरा हाथ दि‍खाई नहीं देता था. उस जंगल में एक सि‍यार था और एक था गधा. गधा सि‍यार से कहीं अधि‍क बड़ा और बलशाली था, पर था तो गधा ही इसलि‍ए सि‍यार ने उसे अपने प्रश्रय में रखा हुआ था. सि‍यार मॉंस खाता और गधा खाता घास. एक दि‍न, सि‍यार को घास में भी स्‍वाद आ गया और वह घास भी खाने लगा. यहां तक कि‍ वह गधे के हि‍स्से का भी सारा जंगल खा गया. गधा रात को लेटा तो उसने फ़ैसला कि‍या कि‍ वह सुबह सि‍यार को ढूंढ कर दुलत्‍ती मार वि‍दा कर देगा उस जंगल से. उस रात गधा भूखा सोया.

सुबह सि‍यार उसे ढूंढता आया और बोला – ‘मुझे पता चला कि‍ कल रात तू भूखा सोया ? ओह, बड़ा बुरा हुआ. ख़ैर कोई बात नहीं, तू मेरे साथ आ, मैं तुझे दि‍खाउंगा कि खाने के लि‍ए‍ घास कैसे उगता है.’

गधा तो गधा ठहरा, मान गया और फि‍र पेट पर पत्‍थर रख सि‍यार के प्रश्रय में हो लि‍या, एक बार फि‍र घास उगने की उम्‍मीद में. उस जंगल में भी घास पॉंच साल में एक ही बार उगता था.
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मंगलवार, 29 नवंबर 2011

(लघु कथा) लोकतंतर


क के यहां चुनाव हुए. सत्ता बदली.

क वाहर निकला तो देखा, सड़क पर झाड़ू लगाने वालों की फ़ौज आई थी. उनके हाथों में नए-नए झाड़ू थे और कूड़ा उठाने की नए डिज़ाइन की टोकरियां भी थी. एक सेनेटरी इंसपेक्टर डाकुओं की तरह मुंह पर रूमाल बांधे सफाई करवा रहा था. क बहुत गर्वित था कि – ‘वाह, देखा (!) इसे कहते हैं लोकतंत्र की ताक़त. सत्ता बदलते ही काम होने लगा न ! वर्ना आज तक तो कभी किसी ने सुध ही नहीं ली थी इस सड़क की सफाई की.’

तभी एक झाड़ूवाली ने क को हड़काया – ‘रे दीदे फूटे हैं क्या, बोरी पे ही चढ़ा चला आ रहा है. सफेद चूना गंदा हो गया तो सड़क के किनारे तेरा सिर डालूंगी क्या ?’ तब उसे समझ आया कि ये तैयारी तो जीतने वाले नेता की आवभगत में हो रही है.
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(लघु कथा) पोस्टर बॉय


 
क दशहरे पर नया-नया शहर आया था. उसने सड़कों के किनारे बड़े-बड़े रंगीन होर्डिंग लगे देखे. उन पर राष्ट्रीय नेताओं की फ़ोटुओं के आगे उजले कपड़ों में हाथ बांधे एक सज्जन बने थे. इन होर्डिंगों पर दहहरे, दिवाली, ईद, गुरपूरब और  नए साल की शुभकामनाएं लिखी हुई थीं. क बड़ा प्रभावित हुआ. ख से बोला – ‘वाह कितना भला आदमी है. घर-घर जा कर सबको राम-राम करने के बजाय लिख कर यहीं टंगवा दी !’

ख – ‘रे भले आदमी, ये प्रापर्टी डीलर यूं गले इलेक्शन में इन्हीं नेताओं वाली पार्टी की टिकट पाने की जुगत भिड़ा रहा है.’
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